भारतीयता का आशय केवल भौगोलिक सीमाओं या राजनीतिक व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं है। यह भारत की आत्मा, संस्कृति, अध्यात्म, विज्ञान और जीवन-दर्शन का समग्र रूप है। भारतीयता “वसुधैव कुटुम्बकम्” की उदात्त भावना और “सत्यमेव जयते” की सत्यनिष्ठा से ओतप्रोत है। इसमें प्रकृति और समाज को अलग-अलग न मानकर एक अखंड इकाई के रूप में देखा गया है। यही कारण है कि भारतीयता में धर्म, संस्कृति, भाषा, विज्ञान और कला सभी एक-दूसरे से गहरे जुड़े हुए दिखाई देते हैं।

आज वैश्वीकरण के युग में, जब पश्चिमी प्रतिमान (models) और अवधारणाएँ शिक्षा एवं शोध पर हावी हो रही हैं, तब यह आवश्यक है कि भारत अपनी स्वाधारित परंपराओं और अनुसंधान पद्धतियों को पुनः प्रतिष्ठित करे। स्वाधारित शोध का अर्थ है—ऐसा शोध जो हमारी मिट्टी, हमारी संस्कृति और हमारे लोकजीवन की समस्याओं और संभावनाओं से जुड़ा हो।

इन्हीं मूल्यों को ध्यान में रखते हुए, श्री त्रिलोचन उप्रेती स्मृति शोध संस्थान द्वारा यह बहुविषयक शोध पत्रिका प्रारंभ की जा रही है, जिसका केंद्रीय विषय है—भारतीयता और स्वाधारित शोध। यह पत्रिका शोधार्थियों, विद्वानों और अध्येताओं को एक ऐसा मंच प्रदान करती है जहाँ भारतीय दृष्टिकोण से विभिन्न विषयों पर अकादमिक विमर्श और अनुसंधान किया जा सके।

उद्देश्य

इस शोध पत्रिका के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं—

भारतीय जीवन-दर्शन, संस्कृति, साहित्य, कला, इतिहास, दर्शन और विज्ञान से जुड़े स्वदेशी दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना।

स्थानीय तथा स्वाधारित ज्ञान परंपराओं का दस्तावेज़ीकरण करना और उन्हें शोध की मुख्यधारा में लाना।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारतीय मूल्यों और अनुसंधान पद्धतियों की प्रासंगिकता स्थापित करना।

शोधार्थियों, छात्रों और अध्येताओं को शोध-लेख प्रकाशित करने का अवसर उपलब्ध कराना।

शोध और समाज के बीच एक सशक्त सेतु का निर्माण करना ताकि अकादमिक ज्ञान केवल पुस्तकों तक न रहकर समाज में प्रत्यक्ष उपयोगी बन सके।

विशेषताएँ

यह पत्रिका निम्नलिखित विशेषताओं के साथ प्रकाशित होगी—

Peer-reviewed प्रणाली: पत्रिका में प्रकाशित प्रत्येक लेख की शैक्षिक गुणवत्ता और प्रामाणिकता सुनिश्चित करने हेतु लेखों का मूल्यांकन विशेषज्ञों द्वारा किया जाएगा।

भाषा: हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में शोध आलेख स्वीकार्य होंगे।

विषय क्षेत्र: साहित्य, समाजशास्त्र, इतिहास, शिक्षा, विज्ञान, पर्यावरण, दर्शन, संस्कृति, कला एवं प्रौद्योगिकी जैसे विविध विषयों पर भारतीय दृष्टिकोण से विमर्श को प्रोत्साहित किया जाएगा।

प्राथमिकता: स्वाधारित अनुसंधान तथा स्थानीय/ग्रामीण मुद्दों को विशेष महत्व दिया जाएगा।

संरचना: प्रत्येक अंक में किसी एक थीम पर आधारित शोध आलेखों के साथ स्वतंत्र आलेखों को भी स्थान मिलेगा।