व्याख्यान शृंखला सारांश
श्री त्रिलोचन उप्रेती स्मृति हिमालयी शोध संस्थान, नगौर, पिथौरागढ़ के तत्वावधान में हिमालय, उत्तराखंड की प्रकृति, संस्कृति, समाज, अर्थव्यवस्था, साहित्य तथा समकालीन चुनौतियों के विविध आयामों पर केंद्रित एक व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया जा रहा है। इस व्याख्यान श्रृंखला का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, दार्शनिक, पर्यावरणीय एवं आर्थिक विशेषताओं तथा वर्तमान चुनौतियों पर विद्वानों के विचारों को समाज एवं युवा पीढ़ी तक पहुँचाना है।
इस व्याख्यान श्रृंखला में प्रज्ञाप्रवाह के अखिल भारतीय टोली सदस्य, लेखक एवं स्तम्भकार श्री भगवती प्रसाद राघव जी की गरिमामयी उपस्थिति एवं मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। कार्यक्रम के आयोजक श्री त्रिलोचन उप्रेती स्मृति हिमालयी शोध संस्थान के सचिव श्री नवीन उप्रेती जी हैं तथा कार्यक्रम के संयोजक डॉ. मनीष उनियाल, एसोसिएट प्रोफेसर, भौतिकी विभाग, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, पौड़ी परिसर हैं।
अब तक श्रृंखला के अंतर्गत निम्नलिखित सात व्याख्यान आयोजित किए जा चुके हैं—
- 19 फरवरी 2026 — प्रो. संदीप सिंह (आई.आई.टी. रुड़की) द्वारा हिमालय का उत्थान एवं भूगर्भीय संरचना विषय पर व्याख्यान दिया गया, जिसमें हिमालय के निर्माण, उत्थान तथा उसकी जटिल भूगर्भीय संरचना को समझने का प्रयास किया गया।
- 29 मार्च 2026 — प्रो. हेमवती नंदन (भौतिकी विभाग, हे.न.ब. गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल) द्वारा हिमालयी लोक संपदा विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया गया, जिसमें हिमालय की लोक परंपराओं, लोक संस्कृति एवं समृद्ध लोक विरासत के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला गया।
- 24 अप्रैल 2026 — डॉ. रमेश चंद्र नैलवाल (संस्कृत एवं वैदिक अध्ययन विभाग, बाबासाहेब भीमराव अंबेड़कर केन्द्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ) द्वारा हिमालय पर्वत का साहित्यिक एवं सांस्कृतिक वैशिष्ट्य विषय पर व्याख्यान दिया गया। इसमें हिमालय के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप तथा भारतीय जीवन-दृष्टि में उसके महत्व को रेखांकित किया गया।
- 17 मई 2026 — डॉ. कविता भट्ट (विभागाध्यक्ष, दर्शन शास्त्र विभाग, हे.न.ब. गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल) द्वारा हिमालयीय परिक्षेत्र— एक दार्शनिक मीमांसा विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया गया, जिसमें हिमालय को केवल भौगोलिक क्षेत्र न मानकर उसके दार्शनिक, आध्यात्मिक एवं मानवीय आयामों की विवेचना की गई।
- 15 जून 2026 — डॉ. सुरेंद्र सिंह (सहायक आचार्य, सामुदायिक चिकित्सा विभाग, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान, श्रीनगर गढ़वाल) द्वारा जलवायु संकट—स्वास्थ्य संकट : बदलती दुनिया में मानव जीवन की सुरक्षा विषय पर व्याख्यान दिया गया। इसमें जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों तथा मानव स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा से जुड़े समकालीन प्रश्नों पर विचार किया गया।
- 21 जुलाई 2026 — डॉ. सुरजीत सिंह (बीएसएम पीजी कॉलेज रुड़की, हरिद्वार/ वर्तमान- उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण) द्वारा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का बदलता स्वरूप : चुनौतियाँ एवं विकास की राह विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया गया, जिसमें उत्तराखंड की बदलती आर्थिक परिस्थितियों, विकास संबंधी चुनौतियों तथा संभावित विकास मार्गों पर चर्चा की गई।
- 09 अगस्त 2026 — प्रो. एच. सी. पुरोहित (संकायाध्यक्ष, मैनेजमेंट संकाय, दून विश्वविद्यालय देहरादून) द्वारा उत्तराखंड आर्थिकी @2025 और भविष्य की संभावनाएँ विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। इसमें आर्थिक क्षेत्र में उत्तराखंड की स्थिति और भविष्य में उन्नति की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
उक्त व्याख्यान श्रृंखला के माध्यम से हिमालय को एक बहुआयामी जीवन-परिक्षेत्र के रूप में समझने का प्रयास किया जा रहा है। अब तक आयोजित व्याख्यानों में हिमालय की भूगर्भीय उत्पत्ति से लेकर उसकी लोक संपदा, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत, दार्शनिक चेतना, जलवायु एवं स्वास्थ्य संकट तथा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था तक के विविध पक्षों को समाहित किया गया है।
श्रृंखला के विषयों की व्यापकता यह स्पष्ट करती है कि हिमालय केवल एक पर्वत श्रृंखला नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति, लोकजीवन, ज्ञान, दर्शन, अर्थव्यवस्था और मानव सभ्यता का महत्वपूर्ण आधार है। वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय असंतुलन, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों तथा आर्थिक विकास के प्रश्नों के संदर्भ में हिमालयी क्षेत्र की समझ और अधिक प्रासंगिक हो गई है।
इस प्रकार यह व्याख्यान श्रृंखला हिमालय के अतीत, वर्तमान एवं भविष्य को विभिन्न ज्ञान-विषयों के माध्यम से समझने, विमर्श को व्यापक बनाने तथा हिमालयी क्षेत्र के प्रति वैज्ञानिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक चेतना विकसित करने की एक सार्थक पहल के रूप में उभर रही है।
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